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तेरे किस्से

1. अरसे पहले एक तस्वीर खींची थीं जो  देख कर लगा दूर किसी खिड़की से झांकती है वो मुझको  मैं भी गया अपने हिस्से की खिड़की खोलने ना जाने कब मोबाइल स्क्रीन बंद हुई तो महसूस हुआ  " वो खिड़की कब की बंद हो चुकी है "  2. यूं तो कुछ पढ़ने  का मन नहीं है  फिर भी तुम लिखना  मै जरूर पढूंगा।

Aaj - kal

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आज कल के इरादे देखिये , देखते है  और नजरान्दाज भी करते हैं ।  इसे आँखो की गुस्ताखियांं कहूंं  तो कैसे वो सरेआम एतराज भी तो करते हैं ।।

Imagination

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बादल के घेरे से देखा है तुझे निकलते हुए , मदमस्त इतना कि आँँखो से फिसलता हैं । क्या खैरियत भी पूछी अब तक किसी ने फिर क्यों दुनिया के लिए जलता हैं  । क्या तेरी भी चाहत है इस दुनिया में किसी से  जो हर रोज समय से निकलता हैं ।. ... yatish.C

One night ( एक रात )

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महसूस किया है कभी    अंधेरी रात को  एक विरान सड़क पर  हवा की सरसराहट के साथ  कीट-पतंगो की आवाजे  साथ थी मेरे उस रात  महसूस किया है कभी इम्त़हा तब हुई , इन्कार कर दिया जब अक्स ने साथ चलने से  या कसूर था उन बादलो का  जिसके घेरे में था वह चाँद  जिम्मेदार था जो मेरे हमराह.का महसूस किया है कभी.            Yatish.C

प्रकृति का स्वरूप

सूरज कि सजिश कहूं या आँखो का धोखा   आखिर चाँद को दोपाहर में आने से किसने रोका                                              -  yatish C.